तुला लग्न

अंगिरस - भारद्वाज पुराण

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​​​​जैसा की पहले भी बताया जा चूका है की लग्न वो राशी है जिसमें जातक का जनम हुआ है I इस राशी को जो की लग्न है जातक के जनम के समय पूर्वी क्षितिज में उभरता है I


तुला राशी शुक्र का घर है अवं शुक्र की मूल त्रिकोण राशी राशी भी है. नंबर सात (७) तुला राशी का प्रतिनिधित्व करता है I

तुला के अलावा शुक्र का दूसरा घर वृषभ है I वृषभ शुक्र की साधारण राशी है जिसका प्रतिनिधित्व नंबर दो (२) के द्वारा होता है I


​अगर आपकी जनम लग्न कुंडली के प्रथम भाव में नंबर सात (७) लिखा है इसका मतलब है की आपका लग्न तुला (आपका जनम शुक्र हुआ है) और आपके लग्न का स्वामी शुक्र है I


तुला लग्न के जातकों के लिए -

कारक ग्रह - शुक्र, शनि और बुद्ध

सम ग्रह - चन्द्र

मारक ग्रह - मंगल या कुज, ब्रहस्पति या गुरु और सूर्य

पर इसका तात्पर्य ये बिलकुल नहीं है की कारक ग्रह हमेशा अछे परिणाम देंगे, सम ग्रह हमेशा औसत परिणाम देंगे और मारक ग्रह हमेशा बुरे परिणाम ही देंगे I

बल्कि ग्रहों की कुंडली में स्थिति, ग्रहों का बाला-बल, ग्रह का दूसरे ग्रहों के साथ संयोजन, कुंडली में विपरीत राज योग, नीच भंग राज योग तथा बाकी राज योग और दो आदि संकेतों के माध्यम से ही तय होता है की कोई ग्रह जातक के लिए अछे परिणाम देगा या बुरे परिणाम देगा I


इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने के पहले ऊपर दिए गए संकेतों का कुंडली में गहराई से अध्यन करने के पश्चात् ही निर्णय करें की आपको उस ग्रह को सक्रिय करने या बल देने की जरूरत है या ग्रह को उचित उपायों द्वारा शांत करना है I तत्पश्च्यात ही हमें किसी राशी-रत्न को पहनने या किसी दान आदि को करना चाहिए I


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तुला लग्न में अलग अलग भावों में नवग्रहों के परिणाम


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