अंगिरस - भारद्वाज पुराण


​​​​जैसा की पहले भी बताया जा चूका है की लग्न वो राशी है जिसमें जातक का जनम हुआ है I इस राशी को जो की लग्न है जातक के जनम के समय पूर्वी क्षितिज में उभरता है I


मकर राशी शनि का घर है अवं शनि की साधारण राशी भी है. नंबर दस (१०) मकर राशी का प्रतिनिधित्व करता है I

मकर के अलावा शनि का दूसरा घर कुम्भ है I कुम्भ शनि की मूल त्रिकोण राशी है जिसका प्रतिनिधित्व नंबर ग्यारह (११) के द्वारा होता है I


​अगर आपकी जनम लग्न कुंडली के प्रथम भाव में नंबर दस (१०) लिखा है इसका मतलब है की आपका लग्न मकर है (आपका जनम शनि में हुआ है) और आपके लग्न का स्वामी शनि है I


मकर लग्न के जातकों के लिए -

कारक ग्रह - शनि, शुक्र और बुद्ध

सम ग्रह - मंगल या कुज

मारक ग्रह - ब्रहस्पति या गुरु, चन्द्र और सूर्य

पर इसका तात्पर्य ये बिलकुल नहीं है की कारक ग्रह हमेशा अछे परिणाम देंगे, सम ग्रह हमेशा औसत परिणाम देंगे और मारक ग्रह हमेशा बुरे परिणाम ही देंगे I

बल्कि ग्रहों की कुंडली में स्थिति, ग्रहों का बाला-बल, ग्रह का दूसरे ग्रहों के साथ संयोजन, कुंडली में विपरीत राज योग, नीच भंग राज योग तथा बाकी राज योग और दो आदि संकेतों के माध्यम से ही तय होता है की कोई ग्रह जातक के लिए अछे परिणाम देगा या बुरे परिणाम देगा I


इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने के पहले ऊपर दिए गए संकेतों का कुंडली में गहराई से अध्यन करने के पश्चात् ही निर्णय करें की आपको उस ग्रह को सक्रिय करने या बल देने की जरूरत है या ग्रह को उचित उपायों द्वारा शांत करना है I तत्पश्च्यात ही हमें किसी राशी-रत्न को पहनने या किसी दान आदि को करना चाहिए I


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मकर लग्न

मकर लग्न में अलग अलग भावों में नवग्रहों के परिणाम


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